तितली और फूल की दोस्ती

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  • राजेश पांडेय

हवा से बातें करते हुए नन्हीं तितली बाग की सैर पर निकली है। कभी वह नन्हें पौधों पर होती तो कुछ ही पल में फूलों पर। वह अभी बहुत छोटी है, इसलिए उसे नहीं पता, कहां जाना है। उसे तो बस मां ने हवा के साथ खेलने के लिए भेजा है।

हवा है कि उसके साथ बहुत मस्ती कर रही है। वह एक फूल को अपना दोस्त बनाना चाहती है, पर हवा को पता नहीं क्या मजाक सूझा कि वह फूल को तेजी से हिलाने लगी। तितली को फूल पर बैठने का अवसर ही नहीं मिल पा रहा है। उसने हवा से कहा, बस करो, अगर तुम फूल को आराम नहीं करने दोगे तो मैं उससे बातें नहीं कर पाऊंगी।

हवा ने तितली से कहा, यहां तो बहुत सारे फूल हैं। एक से बढ़कर एक। वो देखो, उन फूलों के पास कितने सारे रंग है। ऐसा लगता है कुदरत ने सारे रंग इनको ही दिए हैं। तुम उन फूलों से बातें क्यों नहीं करती।

तितली बोली, रंग तो मेरे पास भी बहुत सारे हैं। क्या कुदरत ने मुझे भी अपने सारे रंग दिए हैं। और हां, अब तुम शांत हो जाओ हवा, मुझे अपने नये दोस्त से बातें करनी है। हवा ने कहा, ठीक है कर लो बातें। वैसे तुम्हारे नये दोस्त के पास एक ही रंग है। एक रंग का फूल भी कोई सुंदर होता है भला। जैसी तुम्हारी इच्छा। यह कहते ही हवा शांत हो गई।

तितली ने फूल पर बैठते हुए कहा, सॉरी दोस्त, यह हवा सबको परेशान करती है। मजाक करना इसकी आदत है, वैसे दिल की बहुत अच्छी है। फूल ने कहा, जानता हूं। हवा सभी को झूला झुलाती है। जब इसको गुस्सा आता है तब किसी को कुछ नहीं समझती। अभी जितनी तेजी से मुझे झूला झुला रही थी, एक बार तो लगा कि बस प्राण निकल जाएंगे, हवा भी न बस… यह कहते हुए फूल तेजी से हंसने लगा। हंसी रोक कर फूल ने कहा, अरे मैं तुमसे यह पूछना भी भूल गया कि तुम्हारा नाम क्या है।

तितली ने कहा, मेरा नाम एंजिल है। मेरी मम्मा ने रखा है, यह नाम। फूल ने कहा, बहुत अच्छा नाम है, जैसा नाम, वैसी ही सुन्दर हो तुम। तुम्हारा नाम क्या है, तितली ने पूछा। फूल बोला, मेरा नाम….। मुझे याद नहीं आ रहा अपना नाम। तितली ने जोरों से हंसते हुए कहा, कोई अपना नाम भी भूलता है भला। यह सुनते ही फूल निराश होकर मुरझाने जैसा हो गया। तितली ने कहा, सॉरी दोस्त, नाम में क्या रखा है। तुम मेरे दोस्त हो, वो भी पक्के दोस्त। क्या तुम मेरे साथ खेलोगे।

फूल ने कहा, अच्छा एक बात बताओ, यहां इतने सारे एक से बढ़कर एक फूल हैं, पर तुमने सबसे पहले मुझसे ही क्यों दोस्ती की। मेरे पास तो एक ही रंग है। मैं उनके जैसा सुंदर भी नहीं दिखता। तितली ने कहा, तुम्हारे पास एक ही रंग है तो क्या हुआ। तुम भी तो औरों की तरह फूल हो। मेरी मम्मा बता रही थी कि फूलों को देखकर, उनसे बातें करके मन खुश हो जाता है। तुम तो एक रंग में भी कितने सुंदर लग रहे हो।

तितली की बातें सुनकर फूल मुस्कराने लगा। तितली ने उसकी ओर देखकर कहा, हंसते – मुस्कराते हुए कितने अच्छे लगते हो तुम । फूल ने कहा- बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूं। तितली ने कहा, क्या मैं तुम्हारे साथ खेल सकती हूं। फूल ने कहा, हां, हां… क्यों नहीं। बड़ा मजा आएगा। अच्छा तुम मुझे पकड़ो। यह कहकर फूल ठीक उसी तरह हिलने लगा, जैसे कि उसे हवा झुला रही हो। तितली काफी प्रयास के बाद भी फूल को नहीं छू सकी। थक हारकर तितली ने कहा, अच्छा दोस्त मैं हार गई। अब तुम्हारी बारी है, तुम मुझे पकड़ो।

तितली फूल को छूती और फिर उससे थोड़ा ऊंचा उड़कर कहती, मुझे पकड़ो। फूल भी कुछ ऊपर उठने की कोशिश करता, लेकिन तितली को छू नहीं पाता। कुछ ही देर में फूल बोला, तुम जीत गई दोस्त।

अब तितली और फूल के बीच दोस्ती हो गई। तितली के साथ उसकी और दोस्त भी फूल के साथ खेलने आतीं। हर बार तितलियां फूल के पास अपना कोई न कोई रंग छोड़ जातीं। कुछ समय में ही फूल के पास बहुत सारे रंग हो गए। अब वो पहले की तरह एक रंग का नहीं था। वह बहुत सुंदर दिखने लगा। वह बहुत खुश हो गया। उसने तितली से कहा, थैंक्यू दोस्त, तुमने तो मुझे इतने सारे रंग दे दिए और मुझे पता भी नहीं चला। तितली बोली, अच्छा दोस्त को भी थैंक्यू बोलना पड़ता है। यह कहकर तितलियां फूल को बॉय-बॉय कल मिलते हैं, कहकर अपने घर लौट गईं।

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